Indian History Books Re-Writing : फिर से लिखा जा रहा है भारत का वास्तविक इतिहास, अगले वर्ष मार्च तक आ सकती है पहली वॉल्यूम

Indian History Books Re-Writing : यूरोपीय और इस्लामी आक्रान्ताओं की ओर से लिखा गया भारत का आधा-अधूरा इतिहास अब बीते समय की बात हो जायेगा. अब साक्ष्यों और तथ्यों के साथ भारतीय द्रष्टिकोण से इतिहास का पुर्नलेखन (Indian History Books Re-Writing) शुरू हो चुका है.

Indian History Books Re-Writing : इस समय जिस एक विषय पर भारत में सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है वो है भारत का ‘इतिहास’. बीते सप्ताह प्रधानमन्त्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह दोनों ने असम सरकार के एक कार्यक्रम में सदियों से देश मे पढ़ाए जाने वाले फर्जी इतिहास का ना सिर्फ मुद्दा उठाया, बल्कि इतिहास में सुधार (Indian History Books Re-Writing) करने के लिए भी जोर दिया था. लेकिन अब भारत का यह आधा अधूरा और फर्जी ‘इतिहास’, इतिहास की बात हो जायेगा.

भारत का ‘सही’ इतिहास लिखने जा रही है ICHR (Indian History Books Re-Writing)

इतिहास पर शोध करने वाली भारत सरकार की संस्था भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (ICHR) Comprehensive History of India नाम के प्रोजेक्ट के माध्यम से भारत का वास्तविक इतिहास कुल 9 Volume में लिखवा रही है. प्रोजेक्ट से जुड़े एक इतिहासकार के अनुसार अभी भारत का वास्तविक इतिहास 9 वॉल्यूम में लिखना (Indian History Books Re-Writing) प्रस्तावित हुआ है लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो ये 9 वॉल्यूम बढ़ कर 12 तक भी हो सकते हैं. फर्स्ट वॉल्यूम अगले साल मार्च तक आने की संभावना जताई जा रही है.

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कुल 9 वॉल्यूम में लिखा जाएगा भारत का वास्तविक इतिहास (Indian History Books Re-Writing)

नए सिरे से लिखे जाने वाले इतिहास के प्रस्तावित 9 वॉल्यूम की बात करें तो फर्स्ट वॉल्यूम में नए सिरे से इतिहास लेखन (Indian History Books Re-Writing) में किन चीज़ों को मुख्य रूप से लिखा जा रहा है. यह सब इस पहले वॉल्यूम मे वर्णित किया जायेगा. भारत के करोड़ो वर्ष के इतिहास में अनेकों बड़ी और प्रमुख घटनाएं हैं. उनका वर्णन और साथ ही ऐसे महापुरुष और वीर योद्धा जिनका भारत के निर्माण में अमूल्य योगदान है उन सबके बारे में इसमें सबकुछ बताया जाएगा. यह एक ट्रेलर की तरह होगा और यह बतायेगा कि ICHR की अगली 8 वॉल्यूम में क्या कुछ विस्तृत रूप से लिखा जाने वाला है.

सेकंड वॉल्यूम मे मानव सृष्टि की उत्पत्ति से लेकर, मानव सभ्यता के विकास के प्रारंभ तक के समय का विस्तृत वर्णन किया जाएगा. यह बताया जाएगा कि उस समय जब ज्ञान के क्षेत्र बहुत ही सीमित थे, तब कैसे भारतीय महापुरुष भारत निर्माण में लगे हुए थे. तत्कालीन प्राचीन अस्त्र, शस्त्र, विद्या के बारे में भी विस्तार से बताया जाएगा.

सबूतों और तथ्यों के साथ दी जाएगी सही जानकारी

थर्ड वॉल्यूम में सभ्यता के उषाकाल से लेकर महाजनपद काल तक का विस्तृत वर्णन किया जायेगा, जिसमे सिंधु-सरस्वती सभ्यता का गौरवमयी इतिहास जिसके सबूत आज राखीगढ़ी में दिखाई पड़ते हैं, उसकी विशेषताओं का वर्णन किया जाएगा. इसके अतिरिक्त इसमें सबूतों और तथ्यों के साथ यह भी बताया जाएगा कि सिंधु-सरस्वती सभ्यता ही विश्व की एक मात्र सबसे प्राचीन सभ्यता हैं.

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चौथे वॉल्यूम में महाजनपद से लेकर गुप्त-वाकाटक काल शुरू होने से पूर्व तक का सम्पूर्ण इतिहास पढ़ाया जाएगा और पांचवे वॉल्यूम में गुप्त-वाकाटक काल से लेकर वर्ष 1191 में सल्तनत काल शुरू होने से पूर्व का इतिहास रहेगा. इस वॉल्यूम में यह भी बताया जाएगा कि इस्लामी राज्य आने से पहले कैसे भारत एक विश्व गुरु था, आर्थिक आधार पर सिरमौर था और महाराजा सुहेलदेव जैसे कई महापुरुषों की वीरता जिसे पूर्व के लिखित इतिहास में ठीक जगह नही मिली उन्हें भी इस वॉल्यूम में उचित और सम्मानजनक जगह दी जाएगी.

देश के चक्रवर्ती सम्राटों को भी मिलेगी जगह 

सिक्स वॉल्यूम (Indian History Books Re-Writing) में सल्तनत काल की शुरुआत से 1191 से लेकर शिवाजी महाराज के राज्यअभिषेक के काल 1674 के शुरू होने से पहले के समय के बारे में विस्तार से बताया जाएगा. इस वॉल्यूम में पूर्व की तरह इस्लामी शासन का महिमामण्डन नहीं बल्कि उनके शासन की तथ्यों के सहारे वास्तविकता बताई जाएगी. उनके अत्याचारों और गलत कामों को भी बताया जायेगा और ठीक इसी समय कैसे भारत के अन्य वैभवशाली साम्राज्य विजय नगर, अहोम राज्य काम कर रहे थे, इसके सम्बन्ध में भी बताया जाएगा.

भारतीयों के द्रष्टिकोण से लिखा जायेगा इतिहास (Indian History Books Re-Writing)

भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के निदेशक डॉ उमेश कदम के अनुसार इस नए इतिहास लेखन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस इतिहास को लिखने में “Primary Sources” का प्रयोग किया जाएगा. अर्थात भारत में कब और क्या हुआ इस विषय पर उस समय के भारतीयों ने क्या लिखा, इस आधार पर इतिहास को लिखा जा रहा है (Indian History Books Re-Writing) ना कि घटना के कई शतकों के बाद यूरोपियों और फारसियों ने क्या लिखा औए क्या देखा इस आधार पर. जिसके कारण आज आज़ादी के 75 वर्ष बाद फिर से ICHR को इतिहास लेखन करना पड़ रहा है.

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मुगलों-सुलतानों का नहीं किया जायेगा महिमामंडन (Indian History Books Re-Writing)

ICHR के सदस्य सचिव उमेश कदम के अनुसार भारत के पुराने इतिहास लेखन में कई चक्रवर्ती महान राजाओं को इतिहास की पुस्तकों में स्थान नहीं दिया गया, जबकि उनका भारत और भारत की सभ्यता के प्रति महत्वपूर्ण और अमूल्य योगदान था. किन्तु तत्कालीन इतिहासकारों ने उन्हें या तो सिर्फ कुछ पंक्तियों में ही समेट दिया या तो उनके सम्बन्ध में एक लाइन भी नहीं लिखी.  डॉ उमेश कदम के अनुसार पूर्ववर्ती इतिहासकारों ने सिर्फ उत्तर भारत के इतिहास को ही भारत के इतिहास की तरह प्रस्तुत किया, जिसमें सुलतानो और मुगलों का सबसे ज्यादा महिमामंडन किया गया . यही वजह है कि आज भारत की पीढियां कश्मीर का सल्तनत काल से पहले का सही इतिहास नही जानती हैं. किन्तु अब जिन्हें इतिहास (Indian History Books Re-Writing) में उचित स्थान मिलना चाहिए था, उन्हें उनका उचित स्थान अवश्य दिया जाएगा.

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