Joshimath Crisis : जोशीमठ में लगातार बिगड़ रही स्थिति; 800 से ज्यादा इमारतों में दरारें, 165 डेंजर जोन

Joshimath Crisis : हिमालय की गोद में बसा जोशीमठ इस समय एक बड़ी प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहा है। उत्तराखंड के जोशीमठ में आज भी लैंड सिंकिंग देखी जाती है। जमीन, मकान, भवन तोडऩे का सिलसिला जारी है।  जोशीमठ में अब तक 800 से ज्यादा इमारतों में दरार आ चुकी है। स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है।

Joshimath Crisis : हिमालय की गोद में बसा जोशीमठ इस समय एक बड़ी प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहा है। उत्तराखंड के जोशीमठ में आज भी लैंड सिंकिंग देखी जाती है। जमीन, मकान, भवन तोडऩे का सिलसिला जारी है। जोशीमठ में अब तक 800 से ज्यादा इमारतों में दरार आ चुकी है। स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। सोमवार को एक अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक जोशीमठ में सोमवार तक 849 इमारतों में दरार आ चुकी है. कई जगह जमीन धंस गई है और जमीन में दरार भी पड़ गई है। ऐसे में यहां के नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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जोशीमठ में 849 इमारतों में दरार

इसरो द्वारा कुछ दिन पहले जारी की गई जोशीमठ की सैटेलाइट तस्वीरों से साफ है कि जोशीमठ दिन-ब-दिन कैसे बदहाल होता जा रहा है. ये तस्वीरें कार्टोसैट-2एस सैटेलाइट से ली गई हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक जोशीमठ में अब तक 849 इमारतों में दरार पाई गई है. इनमें से 165 इमारतें डेंजर जोन में हैं। साथ ही अब तक 237 परिवारों के करीब 800 नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

दिसंबर माह से जमीन कटान शुरू हो गया

दिसंबर माह के अंत से जोशीमठ में कटान की घटनाएं शुरू हो गई थीं। जोशीमठ उत्तराखंड के चमौली जिले में 6150 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। जोशीमठ हिंदुओं के सबसे पवित्र चारधामों में से एक बद्रीनाथ का प्रवेश द्वार है। इस गांव की आबादी 20 हजार है।

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190 परिवारों को मिला मुआवजा

सचिव रंजीत सिन्हा द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, ‘उत्तराखंड सरकार द्वारा 190 प्रभावित परिवारों को 2.85 करोड़ रुपये की सहायता राशि दी जा चुकी है. अब तक 237 परिवारों के 800 सदस्यों को अस्थायी राहत शिविरों में स्थानांतरित किया गया है। केन्द्र सरकार की ओर से केन्द्रीय भवन अनुसंधान संस्थान द्वारा भवनों पर क्रेक मीटर लगा दिये गये हैं और नुकसान का आकलन कर लिया गया है. अब तक 400 घरों के नुकसान का आकलन किया जा चुका है।

पानी का रिसाव कम हुआ

रंजीत सिन्हा ने कहा कि वाडिया इंस्टीट्यूट ने जोशीमठ में तीन एपिसेंटर खोजे हैं, आगे की जानकारी जुटाई जा रही है। उन्होंने जमीन से पानी का रिसाव कम होने पर संतोष जताया। जेपी कॉलोनी में दो जनवरी से पानी लीक हो रहा है। इससे पहले प्रति मिनट 540 लीटर पानी का रिसाव हो रहा था। लेकिन अब यह मात्रा कम हो गई है और अब 163 लीटर प्रति मिनट लीक हो रहा है।

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